शब्दों के जाल बुनते हैं अब...
गरीबों का खून चूसने वाले लोग
वो जानते हैं,
ये हंसुए से नहीं काटा जा सकता
सच कहता हूँ
गुंड्डे और चोर नेताओं से ज्यादा खतरा
कवि बन चुके नेताओं से है
साले अलंकारों का प्रयौग भी जानते हैं
संज्ञाओं को सर्वनाम बनाना भी
गरीबों का खून चूसने वाले लोग
वो जानते हैं,
ये हंसुए से नहीं काटा जा सकता
सच कहता हूँ
गुंड्डे और चोर नेताओं से ज्यादा खतरा
कवि बन चुके नेताओं से है
साले अलंकारों का प्रयौग भी जानते हैं
संज्ञाओं को सर्वनाम बनाना भी
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