मैं सहज बहना चाहता हूँ,
नदी की तरह
तालों की खूबसूरती का कायल हूँ
पर एक जगह थमे रहना
मेरे वश की बात नहीं...
ऊँची उड़ान भरना चाहता हूँ,
पंक्षियों की तरह
पर घोसला बनाकर बसने की
मेरी कोई योजना नहीं है...
मेरी वापसी की रह देख रहे
वाशिंदों से
मैं कहना चाहता हूँ
मैं नहीं लौट पाऊंगा...
की निकलना है मुझे,
कोलम्बस की तरह
भारत की खोज में...
{बावरा रणधीर}
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