Saturday, July 23, 2011

ll हिन्दुस्तान मुश्किल में है ll




पुकार रहा राष्ट्र हमें, की फिर आज हिन्दुस्तान मुश्किल में है l
लांघ रहें सीमाएं दुश्मन. और कुछ गद्दार देश की  मिट्टी में है ll


जागृत हों भारतपुत्रों, दीमक लग चुकी हमारी संस्कृति में है l 
कई नापाक नज़रें फिर ग़री, हमारी विश्वविजयी तिरंगें पे है ll




करों न विचार रास्तों का अब, बस हम मज़िलों का रुख लें l
गाँधी, सुभाष, आज़ाद, कुवर सिंह से अब तो कोई सिख लें ll

सरफरोशी की तम्मना, जगाना अब हरेक के दिल में है l
दिखा दो दुश्मनों को, बल कितना हमारी बाजुओं में है ll




तुम अहिंसा से लड़ो, या करो अश्त्रों - शास्त्रों से श्रृंगार तुम l
सीना ताने डटे रहना, तुम ही सेनिक और हो सम्मान तुम ll 

जागृत हों भारतपुत्रों !
लांघ रहें सीमाएं दुश्मन. और कुछ गद्दार देश की भूमि में हैं l
राष्ट्र है पुकार रहा, की फिर आज हिन्दुस्तान मुश्किल में है ll




... भारतपुत्र (रणधीर)