Sunday, October 2, 2011

वीर था लाल बहादुर अपना, गाँधी भी कहाँ डरने वाला था
सत्य-अहिंसा से हथियारों से वो तो संग्राम लड़ने वाला था
सादगी ही थी पहचान उनकी, और मनोबल हीरे सा कठोर
याद कर उन देवातमाओं, को मिल कर बढ़ें प्रगति कि ओर. . .


. . . रणधीर

" !! शात्री जी और बापू को कोटि कोटि प्रणाम !! "

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