आये कई... और लूट के चले गए
कुछ आये और यहीं के हो गए
पर एक ने कुछ ऐसा किया कि हमें गुलाम बना गए
खुद तो नगें थे ही हमें भी नगें कर चले गए...
अस्भयों को सभ्य बनाने में वक़्त तो लगेगा...
सेकड़ों वर्षों कि गुलामी के बाद...
हमें आज़ाद होने में... वक़्त तो लगेगा...
आज शासन हमारा है लेकिन हम स्वतंत्र कहाँ ?
स्वशासन के इन दशकों में हुए कई प्रयास हैं
आरक्षण, पंचायत, और सब्सिडी से कुछ पुराने तो...
शिक्षा, रोजगार, और सूचना से अधिकारों से कुछ नवीन
इन योजनाओं को कार्यान्वित करने में वक़्त तो लगेगा
सेकड़ों वर्षों कि गुलामी के बाद...
हमें आज़ाद होने में... वक़्त तो लगेगा...
बातें भ्रष्टाचार कि हों या अधिकारों के दुरूपयोग कि
अपने स्वार्थों कि पूर्ति कि या कर्तव्यों के प्रति सजगता कि
मानते हैं हम कि है जर्जर अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था
अध्यापन और अनुसन्धान के प्रति हम हैं उदासीन...
अशिक्षा के अन्धकार को दूर करने में वक़्त तो लगेगा
सेकड़ों वर्षों कि गुलामी के बाद...
हमें आज़ाद होने में... वक़्त तो लगेगा...
-- रणधीर
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