Thursday, June 9, 2011

शहीदों के लिए आँसूं न बहाना

उन्होंने कहा था...
शहीदों के लिए आँसूं न बहाना।
याद करना उन्हें...
जब अपनी आज़ादी का गुमाँ हों।

पर आज मैं रोना चाहता हूँ,
शहीदों कि मौत पर...
अपनी बेतुकी आज़ादी पर,
और इस लोकतंत्र पर।

अन्वेषण करना चाहता हूँ कारणों का
राष्ट्रभक्ति की क्षणभंगुरता का...
गद्दारों की बिलाश्ता का
और दुश्मनों के संरक्षण का 

आखिर क्यों ?
कभी कंधे से कन्धा मिला के चलें थे
आज वही अनेकता में एकता का देश
बिखरा हुआ क्यों है ?

कभी सोने की चिड़ियाँ कहलाने वाला राष्ट्र 
अपने धरती पुत्रों के लालन-पालन में
अक्षम क्यों है ?

दुनिया को सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाने वाला
हमारा देश अब विलायती संस्कृति की
गुलाम क्यों है ?

तक्षशिला और नालंदा का इतिहास समटे
हम भारतियों को उस उत्कृष्टता का 
अभाव क्यों है ?


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