रोकना चाहते हो... क़यामत को ?
तो इच्छाएं प्रगट क्यों करते... स्वछंदता से
साहस है तुमे लड़ने की... लड़ पाओगे ?
तो करते नहीं क्यों विरोध... अत्याचारियों का
कहते हो देश गन्दा है... सफाई करोगे ?
तो करते क्यों नहीं अधिकारों का उपयोग
और कर्तव्यों का पालन... सजगता से
कहते हो... तुम में भीं हैं सारी खूबियाँ...
वो जुनू भी है और वो निर्भीकता भी...
तो फिर मशाला क्यों नहीं जला अबतक...
क्या तुम्हें क्रांति की ज़रुरत महशुस नहीं होती..?
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