Wednesday, April 13, 2011

फिर जीद हमें करना होगा !

जोश और जूनूं, का हो संचार
आओ करें हम अपने देश पे विचार
बंद करें ये कदाचार और भ्रष्टाचार
करें स्वतंत्र भारत का स्वप्न साकार

कहाँ है जनता का, जनता के लिए लोकतंत्र
आज कानून गया है अपने अंधेपन से हार
जनता का बखूबी हो रहा है शोषण
और भर रहा है नेताओं का स्व-भंडार

तोड़ने हो अगर बेड़ियाँ अपनी स्व-परतंत्रता की
फिर से कई आन्दोलन हमें करने होंगे
नव उलास भर, नव चेतना को जागृत कर
क्रांति के पथ पे बढ़ाना होगा, फिर जीद हमें करना होगा
फिर जीद हमें करना होगा

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