Friday, February 4, 2011

हम भारतीय हैं !

सुखी रोटी-दाल सही, हैं हम कंगाल सही
अपने मन कि करतें हैं अपने मन से जीते हैं
रोज एरी घिस्तें हैं, फिर जम के हडियाँ पीतें हैं
चलो बीती एक और शाम सही, कल कि बातें काल सही

न है बिजली न है पंखा, न खाट का है काम कोई
उप्पर अम्बर नीचे घास, इस ना है आराम कोई

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