हमारे पास वक़्त बहुत कम !
जिंदगी के इस सफ़र में ...
अब तक अकेले हैं हम !
रोज दिन गुजरता है ...शाम ढलती है ...फिर
नए ख्वाबों को संजोयें...रात आती है ...
सारी रात ख्वाबों को जीने के बाद
फिर जब नए ताज़गी लिए सुबह आती है...
फिर से वही आत्म-विश्वास और सव्भिमान लिए
राहों पे आगे कि और तेज़ी चल देता हूँ...क्योंकि
जिंदगी बहुत लम्बी है और हमारे पास वक़्त कम !
पर पथ के काँटों से पग छली होने लगतें हैं,
तो किसी कि...
कोमल स्पर्श कि जरूरत महशूस होती है...
मैं जब रास्तों के ठोकरें खा कर गिरता हूँ...
तो एक फिर ...किसी कि...
किसी हाँथ कि कमी महशूस होने लगती है...
जब सूरज तेज़ गर्मी शरिर कि ऊर्जा चूसने लगती है...
तो किसी कि
आँचल कि छाऊँ कि जरूरत मसूस होती है...
जब रह के थपेड़ों से, हिम्मत टूटने लगती है,
तो किसी...
सहारे कि जरूरत महशुस होने लगती है...
जब थक-हर कर थोड़ी देर सुस्ताने को जी चाहता है...
तब किसी के गोद कि जरूरत महसूस होती है...
और जब पथेर पे सर रख कर sone कि कोशिश करता hoon
तो पत्थर कि कठोरता हर पल मुझे...
इस बात का एहसास दिलाती है कि ...
मैं अकेला हूँ...!!!
क्योंकि जिनदगी बहुत बड़ी है और हमारे पास वक़्त कम है...
जिंदगी के सफ़र मैं हर पल, अकेलेपन का एहअसास होता है...
जिंदगी गुजर जाती है कितनी मोहोब्त से...?
जब हमसफ़र का साथ होता है...!
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